झारखंड में धान खरीद की व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव

झारखंड में धान खरीद की व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव

झारखंड में धान खरीद की व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव, बिचौलियों पर कसेगा शिकंजा!

रांची: झारखंड में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान बेचने वाले किसानों के लिए एक बड़ी और जरूरी खबर सामने आई है। सरकार ने धान खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सख्त बनाने के लिए नियमों में कड़े बदलाव की तैयारी कर ली है। अब राज्य का कोई भी किसान अपनी जमीन के सत्यापन और e-KYC के बिना सरकार को धान नहीं बेच सकेगा।

खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस कड़े प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है। अब इसे अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट भेजा जा रहा है।

30 नवंबर तक का अल्टीमेटम प्रस्ताव के अनुसार, खरीफ विपणन मौसम के लिए 30 नवंबर तक हर किसान को अपनी जमीन का सत्यापन अंचल कार्यालय या ई-उपार्जन पोर्टल से कराना होगा। जिन किसानों की e-KYC पेंडिंग है, उन्हें भी इसी समय सीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करनी होगी; वरना वे अपनी उपज सरकारी दर पर नहीं बेच पाएंगे। आवेदन में आधार कार्ड, बैंक खाता, मोबाइल नंबर के साथ जमीन का रकबा, खाता और प्लॉट संख्या दर्ज करना अनिवार्य किया गया है।

AI, CCTV और GPS से होगी कड़ी निगरानी धान खरीद और परिवहन में किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए तकनीक का कड़ा पहरा रहेगा। खरीद केंद्रों के वजन, स्टैकिंग और लोडिंग एरिया पर CCTV कैमरे लगाए जाएंगे, जिन्हें रांची स्थित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से सीधे जोड़ा जाएगा। 30 दिनों तक की रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखी जाएगी और पूरी व्यवस्था पर AI तकनीक से नजर रखी जाएगी।

इसके अलावा, खरीद केंद्र से राइस मिल और वहां से डिपो तक अनाज पहुंचाने वाले हर वाहन में जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग अनिवार्य होगी। बिना GPS वाले वाहनों को परिवहन की अनुमति नहीं मिलेगी। वहीं, राज्य के बाहर के राइस मिलों को इस बार धान नहीं भेजा जाएगा।